दूरदर्शन के कर्मवीर

 

दूरदर्शन के कर्मवीर

दूरदर्शन के हम कर्मवीर,

सूचना के हम रणवीर

 

सन् उन्नीस सौ उनसठ में,

शुरू हुई अपनीकहानी।

लेकर"सत्यम शिवम सुंदरम्" का मंत्र,

बढ़ा कारवाँ, सूचनापथ पर।

मनोरंजन को दिया आधार,

जो पहुँचाजन-जन के द्वार।

बना विकास का एक हथियार,

खोला गाँव-गाँव में ज्ञान का द्वार।

 

दूरदर्शन के हम कर्मवीर,

सूचना के हम रणवीर।

 

सन् बयासी में बहुरंगी हुए,

तकनिकी ने इतिहास रचे।

एशियन गेम्स को घर-घर लाकर,

युवाओं ने ख्वाब सजाएं

रामायण-महाभारत को दिखाकर,

सतयुग-त्रेतायुगमेंपहुँचाया।

"मिले सुर मेरा तुम्हारा" गाकर,

भारतवर्ष कोसुरबध्द किया।

दूरदर्शन के हम कर्मवीर,

सूचना के हम रणवीर

 

लोगों में विश्वास जगाया,

हर बाधा को सहज सुलझाया।

न रुकते हैं, न थकते हैं,

हम हैं दूरदर्शन के वीर।

तमस फैलाती रातों मे,

सूचनाओं का दीप जलाते।

अपना रास्ता खुद बनाकर,

हर चुनौती से टकराते।

 

दूरदर्शन के हम कर्मवीर,

सूचना के हम रणवीर

 

 26 जनवरीहो या 15 अगस्त,

कर्तव्य पथ से घर-घर जुड़ते।

लाल किले कि प्राचीर से,

प्रधानमंत्री को घर-घर सुनते।

वीरों की गाथा, उनका जोश,

हम ही तो सबको सुनाते।

 सुदूर गाँवों से लेकर,

विदेशों तक नाम रौशन किया।

भारत की बातें, भारत की खबरें,

घर-घर तक हमने पहुँचाया।

ज्ञान, मनोरंजन, संस्कृति का दर्पण,

बनता जीवन में सहज समर्थन।

हम करते जन-जन को जागरूक,

हर मन में भरते संकल्प अटूट।

 

दूरदर्शन के हम कर्मवीर,

सूचना के हम रणवीर।।

  

~निलय पाराशर

(काँपी एडिटर)डीडीके भोपाल